गणेश 21 दिवसीय विशिष्ट कृपा प्राप्ति स्तोत्र

नमस्कार दोस्तों जय मां मेलडी, हर हर महादेव , जय श्री गणेश सभी को। दोस्तों आज में आपको श्री गणेश जी का एक ऐसा स्तोत्र बताऊंगा जिसका 21 दिवस तक निरंतर रोज 21 पाठ करने पर गणेश जी की विशिष्ट कृपा प्राप्त होती है। पहले में आपको स्तोत्र बताता हु फिर उसको करने की विधि बताऊंगा।
     
                        तो चलिए शुरू करते हे : -

सदात्मरूपं सकलादिभूतममायिनं सोऽहमचिन्त्यबोधम्।

अनादिमध्यान्तविहीनमेकं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥1


अनन्तचिद्रूपमयं गणेशमभेदभेदादिविहीनमाद्यम्।

हृदि प्रकाशस्य धरं स्वधीस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥2


समाधिसंस्थं हृदि योगिनां यं प्रकाशरूपेण विभातमेतम्।

सदा निरालम्बसमाधिगम्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥3


स्वबिम्बभावेन विलासयुक्तां प्रत्यक्षमायां विविधस्वरूपाम्

स्ववीर्यकं तत्र ददाति यो वै तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥4


त्वदीयवीर्येण समर्थभूतस्वमायया संरचितं च विश्वम्।

तुरीयकं ह्यात्मप्रतीतिसंज्ञं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥5


त्वदीयसत्ताधरमेकदन्तं गुणेश्वरं यं गुणबोधितारम्।

भजन्तमत्यन्तमजं त्रिसंस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥6


ततस्त्वया प्रेरितनादकेन सुषुप्तिसंज्ञं रचितं जगद् वै।

समानरूपं ह्युभयत्रसंस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥7


तदेव विश्वं कृपया प्रभूतं द्विभावमादौ तमसा विभान्तम्।

अनेकरूपं च तथैकभूतं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥8


ततस्त्वया प्रेरितकेन सृष्टं बभूव सूक्ष्मं जगदेकसंस्थम्।

सुसात्ति्‍‌वकं स्वपन्मनन्तमाद्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥9


तदेव स्वपन् तपसा गणेश सुसिद्धरूपं विविधं बभूव।

सदैकरूपं कृपया च तेऽद्य तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥10


त्वदाज्ञया तेन त्वया हृदिस्थं तथा सुसृष्टं जगदंशरूपम्।

विभिन्नजाग्रन्मयमप्रमेयं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥11


तदेव जाग्रद्रजसा विभातं विलोकितं त्वत्कृपया स्मृतेन।

बभूव भिन्न च सदैकरूपं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥12


सदेव सृष्टवा प्रकृतिस्वभावात्तदन्तरे त्वं च विभासि नित्यम्।

धिय: प्रदाता गणनाथ एकस्तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥13


त्वदाज्ञया भान्ति ग्रहाश्च सर्वे प्रकाशरूपाणि विभान्ति खेवै

भ्रमन्ति नित्यं स्वविहारकार्यास्तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:।।14


त्वदाज्ञया सृष्टिकरो विधाता त्वदाज्ञया पालक एकविष्णु:।

त्वदाज्ञया संहरको हरोऽपि तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥15


यदाज्ञया भूमिजलेऽत्र संस्थे यदाज्ञयाप: प्रवहन्ति नद्य:।

स्वतीर्थसंस्थश्च कृत: समुद्रस्तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥16


यदाज्ञया देवगणा दिविस्था ददन्ति वै कर्मफलानि नित्यम्।

यदाज्ञया शैलगणा: स्थिरा वै तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:।

यदाज्ञया देवगणा दिविस्था ददन्ति वै कर्मफलानि नित्यम्।

यदाज्ञया शैलगणा: स्थिरा वै तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥17


यदाज्ञया शेषधराधरो वै यदाज्ञया मोहप्रदश्च काम:।

यदाज्ञया कालधरोऽर्यमा च तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥18


यदाज्ञया वाति विभाति वायुर्यदाज्ञयागि‌र्न्जठरादिसंस्थ:।

यदाज्ञयेदं सचराचरं च तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥19


यदन्तरे संस्थितमेकदन्तस्तदाज्ञया सर्वमिदं विभाति।

अनन्तरूपं हृदि बोधकं यस्तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥20


सुयोगिनो योगबलेन साध्यं प्रकुर्वते क: स्तवनेन स्तौति।

अत: प्रणामेन सुसिद्धिदोऽस्तु तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:॥21


ये स्तोत्र का नाम एकदंत शरणागति स्तोत्र है इस स्तोत्र के बारे में बोहोत कम लोग जानते है इस स्तोत्र को 21 दिन तक रोक 21 बार इस स्तोत्र का पाठ करके गणपति जी को सुनाना है। आप किसी भी गुरुवार से इसका पाठ प्रारंभ कर सकते है। आपको पाठ वाचिक रूप में करना है। आप गणपति जी से अपनी कोई भी समस्या दूर करने के लिए भी प्राथना कर सकते हे जैसे धंधा ना चलना कोई बीमारी या कोई अन्य समस्या। आप इस स्तोत्र को संकल्प लेके भी कर सकते है और संकल्प बिना भी दोनो ही मान्य होगा लेकिन संकल्प लेने पर तीव्र रिजल्ट मिलेगा।

में मेरा सम्पूर्ण ज्ञान गुरु माता मां KHUNKHAR MELDI(Bareja Dham) तथा गुरु पिता महादेव और गुरुदेव श्री गणेश का प्रसाद समझता हूं तथा सारा श्रेय उनके श्री चरणों में समर्पित करता हूं।




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