नमस्कार दोस्तों जय मा मेलडी,हर हर महादेव,जय श्री गणेश। मनुष्य अपने जीवन में अनेक बार समस्याओं का सामना करता है। जब एसी कोई समस्या मनुष्य के जीवन में आ जाती हैं जिसमें से बाहर निकलना उसको कठिन प्रतीत हो या अपना कोई अचानक एसे किसी रोग से ग्रसित हो गया हो जिसमें मृत्यु निश्चित हो या किसी अंग का काम करना बंध होना निश्चित हो। तब मनुष्य देवी - देवता को भोग प्रसाद चढ़ाने की बात करता है कार्य हो जाने पर जिसे मन्नत कहां जाता हैं। परंतु मन्नत और बाधा में तनिक फर्क है जो फर्क मनुष्य कई बार समझने में भूल करता है। आज में इसी के बारे में बताने वाला हूं।
आइए पहले मन्नत का अर्थ जानते है।।मन्नत का अर्थ होता है कोई कार्य हो जाने पर हर्ष या उत्साह से अमुक देवी या देवता को भेंट चढ़ा ना या उनके नाम से गरीबों में बांटना। मन्नत भी किसी अमुक कार्य करवाने के लिए ही मांगी जाती हैं परंतु इसमें कार्य करना या ना करना पूरा पूरा ही आधार देवी - देवता के पास होता हैं। मन्नत प्राथना की तरह शुद्ध सात्विक कामना ही हैं। परन्तु इसमें कार्य हो जाने पर अमुक चीजें देवी - देवता को भेंट स्वरूप दी जाती है। मन्नत में किसी भी रूप से देवी - देवता को कार्य करने हेतु बाध्य नहीं किया जाता। में आपको एक उदाहरण देके समझाता हूं मन्नत केसे मानी जाती हैं। अमुक देवी - देवता का धूप - दीपक कर उनके सामने बैठना हे और दोनों हाथ जोड़ कर आंखे बंध कर उनका स्मरण करना है। अब में आपको उदाहरण बताता हूं " हैं प्रभु है विघ्नहर्ता गणेश आप सर्वव्यापी है त्रिकालदर्शी है आप भले लोगो का हित और बुरे लोगो का पतन करने वाले हे प्रभु आपके सेवक पर विघ्न आन पड़ा है में अपने सारे प्रयास कर चुका हूं प्रभु परन्तु बाहर नहीं निकल पा रहा हूं मेरी आपसे अर्जी हे की मेरे सारे विघ्नों का अंत कर मुझे उबारे जैसे ही में विघ्न मुक्त हो जाऊंगा आपको मोतीचूर के लड्डू की मिठाई चढ़ाऊंगा और आपके नाम से 5 गरीबों में दान करूंगा"।
आइए अब बाधा का अर्थ समझते है। बाधा मन्नत से पूर्ण रूप से विपरीत है परन्तु कलिकाल में ज्ञान के अभाव के कारण दोनों को एक ही समझा जाता है। जिसके कारण अनेक लोग पतन का भोग बनते है। बाधा का अर्थ होता है अपना कार्य सिद्ध करने हेतु देवी - देवता को बाधित करना। अगर कोई तंत्र जानकार बाधित करता है तो वह देवी - देवता का तंत्र की शक्तियों का जोर लगाकर देवी - देवता को कार्य करने हेतु बाधित करता है जिसके कारण देवी - देवता को कार्य ना चाहते हुए भी करना पड़ता है परन्तु कार्य हो जाने पर भी भविष्य में इसका दुषपरिणाम ही निकलता है क्यो की कर्मो की गति से स्वयं भगवान भी नहीं बचे। और अगर कोई साधारण मनुष्य बाधा लेता है तो देवी - देवता को आन या दुहाई देता है कभी - कभी ऐसा करने पर कार्य हो तो जाता है परन्तु देवी - देवता रूष्ट हो जाते है और किसी दूसरे देवी - देवता की भी कृपा प्राप्ति नहीं होती और अगर कार्य ना भी हो तो भी दुष्परिणाम ही निकलता है।
क्या होगा अगर मन्नत पूरी किए बिना मृत्यु को प्राप्त हो जाए?
अगर कोई व्यक्ति मन्नत लेता है और उसे पूर्ण करना भूल जाता है तो इसका दुष्परिणाम ही निकलता है। क्योंकि देवी - देवता वचनों के पक्के होते हैं। एसे में किसी ने मन्नत ली है और उसे पूर्ण किए बिना मृत्यु को प्राप्त हो गया है तो एसे व्यक्ति की आत्मा को गति नहीं मिलती भगवान उसे अगला अवतार नहीं प्रदान करते। ऐसे में हमारा धर्म बनता है कि घर में कोई बुजुर्ग हे तो उनसे एक बार पूछ ले की उनकी कोई मनन्नत बाकी तो नहीं? अगर बाकी हे तो सिघ्र ही उसे पूर्ण कर देना चाहिए। और घर में कोई बुजुर्ग ना हो तो पितृ के नाम से 2 अगरबत्ती कर उनसे प्राथना करनी चाहिए कि अगर आपकी कोई मन्नत बाकी है जिस कारण आपकी गति नहीं हो रही तो मुझे बताइए में उसे पूर्ण करने हेतु तैयार हूं। आपको स्वप्न द्वारा मार्गदर्शन मिल जाएगा।
में मेरा सम्पूर्ण ज्ञान गुरु माता मां Khunkhar Meldi Maa(Bareja) तथा गुरु पिता महादेव और गुरुदेव श्री गणेश का प्रसाद समझता हूं तथा सारा श्रेय उनके श्री चरणों में समर्पित करता हूं।